भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बार फिर तेज हो गई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 44,166 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इसके साथ ही साल 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार से उनकी कुल निकासी बढ़कर 3.04 लाख करोड़ रुपये हो गई है। सितंबर में भी विदेशी निवेशकों ने 35,861 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इससे पहले जुलाई और अगस्त में उन्होंने भारतीय शेयरों में निवेश किया था।

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विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे चार प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जिनसे भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, जो विदेशी निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित कर सकती है। तीसरा, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता प्रतिफल। जब अमेरिकी बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना होती है, तो निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां निवेश करना पसंद कर सकते हैं। चौथा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी, जो विदेशी पूंजी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली को केवल भारत की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। वैश्विक बाजारों में बदलते अवसर और निवेश पर मिलने वाला संभावित रिटर्न भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। लगातार बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी इस दबाव को कुछ हद तक कम कर सकती है। बाजार की आगे की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी निर्भर करेगी।