भारत में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर कमजोर मानसून और रिकॉर्ड स्तर के अल नीनो का असर दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस साल महंगाई की शुरुआत मानसून कमजोर होने से पहले ही हो गई थी। अब मौसम से जुड़ा दबाव इसे और बढ़ा रहा है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल सितंबर में देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 27 रुपये प्रति किलो थी, जो इस सितंबर में बढ़कर लगभग 54 रुपये हो गई। यानी एक साल में प्याज की कीमत करीब दोगुनी हो गई है।
खाद्य महंगाई भी लगातार बढ़ी है। अगस्त 2026 में खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत रही, जबकि खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई। जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत थी।
भारत में 1 जून से 17 सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में देश में 686.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 806.8 मिमी होती है। कई क्षेत्रों में बारिश की कमी राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक रही।
इस बीच प्रशांत महासागर में मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। इसका असर भारतीय मानसून और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। हालांकि, हर बारिश की कमी को सीधे अल नीनो से जोड़ना उचित नहीं है।
महंगाई पर मौसम के अलावा अंतरराष्ट्रीय कीमतें, खाद्य तेलों का आयात, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू आपूर्ति जैसे कई कारक भी असर डाल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में खाद्य कीमतों पर मौसम और बाजार, दोनों का प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।



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