ब्रिटेन की संसद में जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में एक प्रस्ताव पेश किया गया है। कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने यह प्रस्ताव पेश किया। इसमें जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया गया है।

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ब्रिटेन की संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह प्रस्ताव 12 अक्टूबर 2026 को पेश किया गया था। इसमें 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह द्वारा जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाने का उल्लेख है। प्रस्ताव में भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात कही गई है।

इस प्रस्ताव पर बॉब ब्लैकमैन के अलावा डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के सांसद जिम शैनन और लेबर पार्टी की सांसद गिल फर्निस ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इससे पता चलता है कि इस मुद्दे पर ब्रिटेन की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के सांसदों ने अपनी राय दर्ज कराई है।

प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं के कारण जान गंवाने वाले और घायल हुए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। इसमें सुरक्षा कर्मियों की मौत और कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं का भी जिक्र किया गया है। साथ ही, क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर चिंता जताई गई है।

इसके अलावा, प्रस्ताव में ब्रिटेन में रहने वाले जम्मू-कश्मीर मूल के लोगों के सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को स्वीकार किया गया है। इसमें भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

हालांकि, ब्रिटिश संसद में पेश किया गया अर्ली डे मोशन (EDM) अपने आप में कानून नहीं होता। यह सांसदों को किसी मुद्दे पर अपना समर्थन दर्ज कराने और संसद का ध्यान आकर्षित करने का अवसर देता है। इसलिए इस प्रस्ताव को भारत के समर्थन में दर्ज संसदीय पहल के रूप में देखा जाना चाहिए।