तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने राजनीतिक विरोध के बाद कानून और व्यवस्था विभाग को सूचना के अधिकार (RTI) से छूट देने वाला आदेश वापस ले लिया है। रविवार, 27 सितंबर को विपक्ष और सहयोगी दलों की आलोचना के बाद सरकार ने यह फैसला किया।
मानव संसाधन प्रबंधन विभाग ने नया आदेश जारी कर 21 सितंबर की अधिसूचना रद्द कर दी। पहले सरकार ने RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत सार्वजनिक कानून और व्यवस्था विभाग को खुफिया एवं सुरक्षा संगठन घोषित किया था। इससे विभाग की कई महत्वपूर्ण जानकारियां RTI के दायरे से बाहर हो गई थीं।
इस आदेश का असर सांप्रदायिक और जातिगत संघर्षों, राजनीतिक आंदोलनों, पुलिस कार्रवाई, हिरासत में मौतों और पुलिस यातना से जुड़ी सूचनाओं पर पड़ सकता था। हालांकि, कानून में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित जानकारी के लिए विशेष प्रावधान मौजूद हैं।
सरकार के फैसले का डीएमके और सीपीआई (एम) सहित कई राजनीतिक दलों ने विरोध किया। सीपीआई (एम) सांसद एस वेंकटेशन ने आरोप लगाया कि इससे पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सार्वजनिक जवाबदेही प्रभावित होगी।
वहीं, डीएमके प्रवक्ता सरवनन ने सरकार पर अपराध से संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक जांच से बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने इस आदेश को वापस लेने की मांग की थी।
लगातार उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने छूट समाप्त करने की घोषणा की। अब कानून और व्यवस्था विभाग पर पहले की तरह RTI के प्रावधान लागू होंगे और नागरिक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जानकारी मांग सकेंगे।


