दिसंबर 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा कानून संसद में पारित हुआ था। अब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच उस समय की संसदीय कार्यवाही भी चर्चा में है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) विधेयक 12 दिसंबर 2023 को राज्यसभा और 21 दिसंबर को लोकसभा से पारित हुआ था। कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री वाली तीन सदस्यीय समिति का प्रावधान किया गया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल थे।
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी विपक्ष की ओर से विरोध दर्ज कराने वाले प्रमुख वक्ता थे। उस समय संसद में विपक्षी सांसदों के बड़े पैमाने पर निलंबन की स्थिति थी। 13 दिसंबर की संसद सुरक्षा चूक के बाद विपक्ष गृह मंत्री से बयान और चर्चा की मांग कर रहा था।
21 दिसंबर को विधेयक पारित होने के दिन तक लोकसभा के 100 विपक्षी सांसद निलंबित हो चुके थे। राहुल गांधी निलंबित सांसदों में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्हें इस विधेयक पर बोलने का अवसर नहीं मिला।
बाद में इसी नियुक्ति व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चयन प्रक्रिया पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हुई।