पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विवाद और गहरा गया है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर ही 16.10 लाख मतदाताओं के खिलाफ दाखिल अपीलों को लेकर सवाल उठाए गए थे। ये वे मतदाता थे, जिनके नाम न्यायिक अधिकारियों ने मतदाता सूची में बरकरार रखने का फैसला किया था।


चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि बंगाल SIR से जुड़ी अपीलों की कुल संख्या 38.31 लाख है। इनमें 22.21 लाख अपीलें उन मतदाताओं ने दाखिल कीं, जिनके नाम सूची से हटाए गए थे और वे उन्हें दोबारा शामिल कराने की मांग कर रहे थे। वहीं, 16.10 लाख अपीलें सूची में शामिल किए गए मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दाखिल हुईं। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन 16.10 लाख अपीलों को किसने दाखिल किया।


रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने अगस्त में अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा कि ECI की ओर से इन अपीलों को दाखिल करने के लिए किसे अधिकृत किया गया था और वास्तव में इन्हें किसने दाखिल किया। उन्होंने यह भी दर्ज किया कि उन्हें, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपीलों की प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई थी।


इसी रिपोर्ट में SIR से जुड़े अन्य फैसलों पर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।