दिल्ली में नाबालिगों से दुष्कर्म के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 28 सितंबर को गंभीर चिंता जताई। अदालत ने दिल्ली पुलिस और सरकार को फटकार लगाते हुए सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन घटनाओं की तुलना 2012 के निर्भया कांड से की।

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पिछले दो सप्ताह में राजधानी में नाबालिगों से दुष्कर्म के चार मामले सामने आए हैं। अदालत ने कहा कि पार्क और बसों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी, निगरानी और सुरक्षा सुविधाओं की कमी गंभीर चिंता का विषय है। महिलाओं और लड़कियों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधियों के बयानों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एकजुटता दिखाना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।

हालिया घटनाओं में स्वरूप नगर में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या, देशबंधु गुप्ता रोड पर छह वर्षीय बच्ची तथा सदर बाजार में 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले शामिल हैं। इसके अलावा कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया।

इन घटनाओं के बाद छात्रों और महिला संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शहर के सभी पार्कों की सुरक्षा जांच कराने और आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए हैं।