ऑनलाइन गेमिंग ऐप रमीकल्चर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 442.35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। इसके लिए 25 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आदेश जारी किया गया था।
अटैच की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट, व्यावसायिक दुकानें, एक विला और कई रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के शेयरधारकों के परिजनों, निजी पारिवारिक ट्रस्टों और संबंधित संस्थाओं के नाम पर हैं।
ED के मुताबिक, गेम्सक्राफ्ट और रमीटाइम टेक्नोलॉजीज रमीकल्चर, रमीप्राइम और अन्य ऐप के जरिए ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म संचालित करती थीं। इन प्लेटफॉर्म पर देशभर में लगभग तीन करोड़ यूजर्स थे। कंपनियां दांव पर लगाई गई रकम से 10 से 15 प्रतिशत कमीशन वसूलती थीं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनियों ने खिलाड़ियों की जानकारी के बिना BOT यानी स्वचालित प्रोग्राम का इस्तेमाल किया। इससे खिलाड़ियों को आर्थिक नुकसान हुआ। एजेंसी के अनुसार, कंपनियों ने नए यूजर्स को आकर्षित करने के लिए मार्केटिंग और प्रमोशन पर लगभग 1,035 करोड़ रुपये खर्च किए।
ED का दावा है कि बोनस और आकर्षक ऑफर देकर लोगों को बार-बार खेलने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कथित अवैध कमाई को बाद में विभिन्न निवेशों और संपत्तियों में लगाया गया।
इस ताजा कार्रवाई के बाद मामले में अटैच और फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 2,843 करोड़ रुपये पहुंच गया है। मामले की जांच अभी जारी है।


