बिहार-झारखंड सीमा पर नेशनल हाईवे-133ई स्थित भलजोर पुल की जर्जर हालत ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करीब तीन दशक पुराने इस पुल के तीन में से दो सीमेंट के पिलरों में दरारें दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही जारी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़े ट्रक और कंटेनर गुजरने पर पुल में पहले से अधिक कंपन महसूस होता है। पुल की सड़क पर कई गड्ढे भी बन चुके हैं। इसके अलावा करीब डेढ़ साल से कई स्थानों पर रेलिंग टूटी हुई है। पुल के नीचे गहरी खाई और नदी क्षेत्र होने के कारण दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
यह पुल बिहार और झारखंड के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से आने वाले ट्रक, बसें और अन्य वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं। पिछले तीन दशकों में वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है।
पुल निर्माण विभाग ने भारी वाहनों की आवाजाही रोकने और बैरिकेडिंग लगाने की बात कही थी। चार दिन पहले दोनों तरफ लोहे के पिलर लगाए गए, लेकिन शनिवार तक रास्ता बंद नहीं किया गया था।
विभाग के एसडीओ प्रवेश कुमार के अनुसार, भारी वाहनों को हंसडीहा से गोड्डा होते हुए भेड़ामोड़ की ओर डायवर्ट करने की योजना है। फिलहाल पुल से केवल छोटे वाहनों को गुजरने देने की तैयारी है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल बैरिकेडिंग लगाने, क्षतिग्रस्त पिलरों की तकनीकी जांच कराने और टूटी रेलिंग की मरम्मत करने की मांग की है।


