अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को समर्थन दिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी सहयोग परिषद और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में कहा कि ऊर्जा व्यवस्था को असुरक्षित समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने की जरूरत है।


ट्रंप ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का हवाला देते हुए ऊर्जा अवसंरचना को ईरान से जुड़े जोखिमों वाले मार्गों से दूर ले जाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारे और तेल परिवहन के दूसरे विकल्पों का समर्थन करता है। उनके बयान से 2023 में घोषित इस परियोजना पर फिर से ध्यान गया है।


IMEC का उद्देश्य भारत को खाड़ी देशों के जरिए यूरोपीय बाजारों से जोड़ना है। नेटवर्क में समुद्री और रेल संपर्क के साथ बिजली तथा डिजिटल कनेक्टिविटी और स्वच्छ हाइड्रोजन से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी शामिल है। भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ ने 2023 में परियोजना के ढांचे को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।


परियोजना की प्रगति को इजरायल-हमास युद्ध और क्षेत्रीय तनावों से चुनौतियां मिली हैं। प्रस्तावित मार्ग में यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल शामिल हैं, इसलिए राजनीतिक स्थिरता और देशों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। अगस्त 2026 के एक एशिया हाउस आकलन में परियोजना की चुनौतियों का उल्लेख किया गया था।


भारत के लिए IMEC व्यापार, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित मार्ग से भारत और यूरोप के बीच सामान पहुंचाने के लिए एक बहु-माध्यम नेटवर्क मिल सकता है।