हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के रहने वाले 28 वर्षीय सावन बरवाल ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है। शनिवार, 26 सितंबर को नागोया में आयोजित पुरुषों की मैराथन में उन्होंने रजत पदक जीतकर भारत का 44 साल लंबा इंतजार खत्म किया। उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में दौड़ पूरी करते हुए अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया।

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जापान के इचिताका यामाशिता ने 2:10:49 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेयो फेंग ने कांस्य पदक हासिल किया। इससे पहले भारत को 1982 के एशियाई खेलों में पुरुषों की मैराथन में कांस्य पदक मिला था।

सावन भारतीय सेना में कार्यरत हैं। उन्होंने स्कूल से दौड़ना शुरू किया और जिला तथा राज्य स्तर पर पदक जीते। वर्ष 2019 में सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपने खेल करियर को आगे बढ़ाया।

मैराथन से पहले सावन ने सुना था कि भारतीय धावकों के लिए 2 घंटे 12 मिनट का समय निकालना मुश्किल है। उन्होंने इसे चुनौती बनाया और अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया।

उनकी तैयारी में हर सप्ताह लगभग 200 किलोमीटर की दौड़ शामिल थी। विशेष रूप से अंतिम किलोमीटरों में अपनी गति बनाए रखने पर उन्होंने ध्यान दिया।

नागोया में सावन ने लगभग 35 किलोमीटर तक बढ़त बनाए रखी। इसके बाद जापानी धावक उनसे आगे निकल गए, लेकिन सावन ने दूसरा स्थान सुरक्षित रखा। अब उनका अगला लक्ष्य मैराथन में 2 घंटे 7 से 8 मिनट का समय हासिल करना है।