सऊदी अरब और यमन के हौथी विद्रोहियों के बीच तनाव के बीच मक्का ड्रोन विवाद ने नया राजनीतिक और कूटनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। सऊदी अरब का दावा है कि उसने मक्का के दक्षिण में एक हौथी ड्रोन को पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया। वहीं, ईरान समर्थित हौथियों ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है।


मंगलवार को मक्का और आसपास के इलाकों में हवाई हमले की चेतावनी जारी की गई और लोगों को घरों के अंदर रहने को कहा गया। सऊदी अधिकारियों ने मक्का और मदीना की पवित्र मस्जिदों तथा तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ‘रेड लाइन’ बताया। हालांकि, कथित ड्रोन की वास्तविक दिशा और उसके लक्ष्य को लेकर स्थिति अभी विवादित है।


इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि हौथियों ने हाल के दिनों में यमन के पश्चिमी तट और लाल सागर के रणनीतिक इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाने का दावा किया है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ी है।


मक्का और मदीना पर नियंत्रण सऊदी अरब को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रभाव भी देता है। हज और उमराह से जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण दुनिया भर के मुस्लिम देशों के साथ रियाद के संबंधों में इन पवित्र स्थलों की विशेष भूमिका है।


पाकिस्तान ने भी कथित हमले की निंदा करते हुए मक्का और मदीना की सुरक्षा को अपना कर्तव्य बताया है। हालांकि, सऊदी अरब जानबूझकर मक्का को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है या नहीं, यह फिलहाल आरोप और व्याख्या का विषय है, स्थापित तथ्य नहीं।