टाटा संस को निजी और गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने का मुद्दा गुरुवार की बोर्ड बैठक में अहम रहने वाला है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा बोर्ड के सामने कंपनी को प्राइवेट रखने के पक्ष में अपना रुख रख सकते हैं। उनके करीबी एक व्यक्ति के मुताबिक, नोएल का तर्क है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 11 सितंबर के पत्र में टाटा संस को अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) से जुड़े नियमों का पालन करने को कहा गया है, लेकिन इसमें सीधे तौर पर शेयर बाजार में लिस्टिंग का निर्देश नहीं दिया गया है।
RBI ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी स्वीकार नहीं की है। इसके बाद कंपनी के लिए अपर लेयर NBFC से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी हो सकता है। इसी वजह से टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा RBI से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने और आवेदन खारिज करने का कारण स्पष्ट करने का अनुरोध कर सकते हैं। कंपनी के कानूनी सलाहकार कुछ अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। इनमें कंपनी की संपत्ति को तय सीमा से नीचे लाना या टाटा संस का पुनर्गठन करना शामिल है। हालांकि, ऐसे कदमों के लिए नियामकीय मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है।
इस बीच शापूरजी पल्लोनजी समूह के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने टाटा संस में समूह की हिस्सेदारी को लेकर करीब 25,000 करोड़ रुपये की मांग वाला पत्र बोर्ड के सामने रखने की योजना बनाई है। इस मामले में हितों के टकराव को लेकर कुछ ट्रस्टियों ने चिंता जताई है।