केंद्र सरकार की आपत्ति विधेयक की धारा 2(d)(iii)(B) को लेकर है। इसमें मादक पदार्थों से संबंधित NDPS अधिनियम, 1985 के तहत अपराध करने या उनमें सहयोग करने वाले व्यक्तियों को भी गुंडे की परिभाषा में शामिल किया गया है।
केंद्र के अनुसार, यह प्रावधान पहले से लागू PITNDPS अधिनियम, 1988 के अंतर्गत निवारक हिरासत की व्यवस्था से टकरा सकता है। इससे मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में दो समानांतर कानूनी व्यवस्थाएं बनने की आशंका है। संविधान के अनुच्छेद 254 के तहत भी कानूनी सवाल उठ सकते हैं।
केंद्र ने इस समस्या से बचने के लिए संबंधित धारा से NDPS अधिनियम का उल्लेख हटाने की सिफारिश की है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र की आपत्तियों की समीक्षा की जाएगी। आवश्यक संशोधन के बाद विधेयक दोबारा विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके बाद इसे फिर से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने का विकल्प मौजूद है।


