ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ जारी संघर्ष में आत्मसमर्पण नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने संघर्ष खत्म करने के लिए कूटनीति को रास्ता बताया और अमेरिका के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रहने के संकेत दिए।
पेज़ेश्कियन ने अपने भाषण में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के खिलाफ है, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अपनी रक्षा के लिए किसी दूसरे देश की अनुमति की जरूरत नहीं है।
ईरानी राष्ट्रपति ने इजरायल की परमाणु क्षमताओं का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पर निरीक्षण को लेकर दबाव बनाया जाता है, जबकि इजरायल की परमाणु क्षमताओं को लेकर अलग स्थिति है।
पेज़ेश्कियन ने होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग से जुड़े अधिकारों और सुरक्षा को लेकर ईरान की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र भाषण के एक दिन बाद आया। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का बचाव किया था। इसी बीच न्यूयॉर्क में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं बनी हुई हैं।