जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने अमेरिका से रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर संभावित टैरिफ लगाने से पहले उसके असर पर विचार करने की अपील की है। मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान CNBC-TV18 से बातचीत में डिमोन ने कहा कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किस तरह करती हैं।
डिमोन ने कहा कि रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बीच भारत और वैश्विक तेल बाजार को नुकसान पहुंचाने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रूसी तेल पर टैरिफ लगाना मॉस्को पर दबाव बनाने का सही तरीका है या नहीं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए हैं। कानून अमेरिका को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, भारत पर 100% टैरिफ अभी स्वतः लागू नहीं हुआ है।
डिमोन ने कहा कि रूसी कच्चे तेल को किसी दूसरे स्रोत से बदलना आसान नहीं हो सकता, क्योंकि अलग-अलग रिफाइनरियां विशेष प्रकार के कच्चे तेल के लिए डिजाइन की जाती हैं। उन्होंने अमेरिका और भारत के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की जरूरत बताई।
रॉयटर्स के अनुसार, अगस्त में भारत का रूसी तेल आयात जुलाई के मुकाबले 16.5% घटकर करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।