भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजे गए पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है और गलत जानकारी फैला रहा है। भारत ने मध्यस्थता न्यायालय की कार्यवाही और उसके फैसले को लगातार खारिज किया है।


31 अगस्त 2026 को सिंधु जल संधि से जुड़े मामले में Court of Arbitration ने भारत के संधि को ‘abeyance’ में रखने के फैसले के कानूनी प्रभाव पर एक अवॉर्ड जारी किया था। यह कार्यवाही पाकिस्तान की ओर से शुरू किए गए मामले से संबंधित है। Permanent Court of Arbitration के रिकॉर्ड के मुताबिक, PCA इस मामले में सचिवालय के तौर पर काम कर रहा है।


भारत का कहना है कि इस न्यायालय का गठन संधि की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुआ और उसे भारत के संप्रभु फैसलों पर अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है। वहीं, न्यायालय ने पहले भारत की आपत्तियों पर विचार करते हुए अपनी क्षमता और गठन को वैध माना था।


पहलगाम आतंकी हमले के बाद अप्रैल 2025 में भारत ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने की घोषणा की थी। भारत का कहना है कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि पर उसका रुख नहीं बदलेगा।


जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को अपने दावों के बजाय सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई करके अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी। इस विवाद ने भारत-पाकिस्तान के बीच जल और कूटनीतिक तनाव को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ला दिया है।