भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण व्यवस्था में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नियामक ने बुधवार को ‘बीमा वितरण के अर्थशास्त्र का पुनर्गठन’ नाम से सार्वजनिक परामर्श पत्र जारी किया। इसका उद्देश्य बीमा वितरण को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और ग्राहक-केंद्रित बनाना है।


प्रस्तावों में बीमा बेचने वाले वितरकों की भूमिका और भुगतान व्यवस्था को स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है। IRDAI ने बीमाकर्ताओं और बड़े वितरण संस्थानों से कमीशन नीतियों और संरचनाओं को सरल तरीके से सार्वजनिक करने का प्रस्ताव रखा है। इससे ग्राहकों को बीमा उत्पादों की कीमत में शामिल वितरण लागत को समझने में मदद मिल सकती है।


गलत बिक्री पर रोक लगाने के लिए ग्राहकों की जरूरत और पॉलिसी की उपयुक्तता का रिकॉर्ड रखने का प्रस्ताव है। बैंक और एनबीएफसी कर्मचारियों के लिए मात्रा या पुरस्कार आधारित प्रोत्साहन पर रोक लगाने की बात भी कही गई है। साथ ही, पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान बिक्री से जोड़ने और गलत बिक्री के मामलों में कमीशन की वसूली जैसे उपाय प्रस्तावित हैं।


IRDAI ने बीमा को अन्य वित्तीय उत्पादों के साथ अनिवार्य रूप से बेचने के खिलाफ भी सुरक्षा उपाय सुझाए हैं। इसके अलावा, डिजिटल माध्यमों के जरिए बीमा खरीदने और सर्विस लेने की सुविधा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। बीमा सुगम और सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री के उपयोग को बढ़ाने का प्रस्ताव है।


ये फिलहाल प्रस्ताव हैं। IRDAI ने हितधारकों से 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं।