उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी मंजिल सैनी एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने 2017 में मेरठ में अपहरणकर्ताओं की गोलीबारी के बीच एक डॉक्टर को सुरक्षित बचाने वाले पुलिस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई थी। उनके साहस के लिए वर्ष 2024 में उन्हें गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया।
दिल्ली में जन्मीं मंजिल सैनी ने सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिजिक्स की पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से इंटरनेशनल बिजनेस में उच्च शिक्षा हासिल की और गोल्ड मेडल जीता। करीब तीन साल कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर वह 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी बनीं।
मंजिल सैनी ने मुरादाबाद में तैनाती के दौरान चर्चित किडनी रैकेट की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पुलिस की जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2016 में वह लखनऊ की पहली महिला एसएसपी बनीं।
जुलाई 2017 में मेरठ की एसएसपी रहते हुए उन्होंने तत्कालीन एडीजी प्रशांत कुमार के साथ अपहृत डॉक्टर श्रीकांत गौड़ को छुड़ाने के अभियान का नेतृत्व किया। पुलिस टीम जब अपहरणकर्ताओं के ठिकाने पर पहुंची, तो बदमाशों ने गोलियां चला दीं। इसके बावजूद टीम ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर डॉक्टर को सुरक्षित बचा लिया।
इस बहादुरी के लिए मंजिल सैनी को 2024 में गैलेंट्री मेडल मिला। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश पुलिस में आईजी विजिलेंस के पद पर कार्यरत हैं।


