भारतीय नर्सों के लिए विदेश में करियर बनाना अब सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रह गया है। जर्मनी, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में नर्सिंग प्रोफेशनल्स की मांग बनी हुई है। इसकी एक बड़ी वजह इन देशों में बढ़ती उम्र की आबादी और हेल्थकेयर वर्कफोर्स की कमी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 2023 में दुनिया में नर्सों की कुल कमी करीब 58 लाख थी। 2025 की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दुनिया के कई हाई-इनकम देशों में आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नर्स रिटायर होने वाली हैं। वहीं, बुजुर्ग आबादी बढ़ने से अस्पतालों के अलावा होम हेल्थकेयर, रिहैबिलिटेशन और लॉन्ग-टर्म केयर जैसी सेवाओं की जरूरत बढ़ रही है।
भारत इस ग्लोबल नर्सिंग मार्केट में अहम भूमिका निभाता है। CNA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत हर साल करीब 4 लाख नर्सों को प्रशिक्षित करता है और लगभग 6.4 लाख भारतीय नर्सें विदेशों में काम कर रही हैं। बेहतर वेतन, काम के अवसर और पेशेवर अनुभव भी विदेश जाने की वजहों में शामिल हैं।
हालांकि, हर देश में अवसर एक जैसे नहीं हैं। उदाहरण के लिए ब्रिटेन में 2026 में विदेशी हेल्थकेयर कर्मचारियों के लिए वीजा और भर्ती नियमों में सख्ती देखी गई है। इसलिए विदेश में नर्सिंग करियर के लिए संबंधित देश की मान्यता, भाषा, लाइसेंसिंग परीक्षा और वीजा नियमों को समझना जरूरी है।


