एक समय में नौकरी को लेकर सोच काफी सीधी हुआ करती थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिले, वर्षों तक उसी संस्थान के साथ काम किया जाए और धीरे-धीरे प्रमोशन के जरिए करियर आगे बढ़े। लेकिन AI, ऑटोमेशन और बदलते जॉब मार्केट ने इस सोच को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।
अब कई कर्मचारी सिर्फ एक पद या एक कंपनी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी अलग-अलग स्किल विकसित करने पर ध्यान दे रहे हैं। इसे स्किल स्टैकिंग कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अपने मुख्य काम के साथ दूसरी उपयोगी क्षमताएं भी सीखता है। इसका उद्देश्य बदलती जरूरतों के बीच अपनी रोजगार क्षमता बनाए रखना है।
भारत में भी AI से जुड़े कामों की मांग बढ़ रही है और कंपनियों को नई तकनीकों से जुड़ी विशेषज्ञता वाले कर्मचारियों की जरूरत महसूस हो रही है। Quess Corp की 2026 की एक रिपोर्ट में GenAI और उससे जुड़े क्षेत्रों में बड़ी स्किल कमी की बात कही गई है।
NITI Aayog की AI से जुड़ी रिपोर्ट ने भी बताया है कि तकनीक भारतीय टेक सेक्टर में नौकरियों के स्वरूप को बदल सकती है और नई भूमिकाओं के अवसर पैदा कर सकती है।
ऐसे माहौल में करियर का मतलब केवल एक नौकरी हासिल करना नहीं रह गया है। लगातार सीखना, डिजिटल टूल्स को समझना और अपनी मुख्य विशेषज्ञता के साथ नई स्किल जोड़ना पेशेवरों की रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है। यानी नौकरी बदलने की मजबूरी के साथ-साथ करियर को सुरक्षित रखने का तरीका भी बदल रहा है।