अमेरिका और रूस के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिकी नौसेना का नया गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Ted Stevens 27 सितंबर 2026 को अलास्का के व्हिटियर पहुंच गया। अत्याधुनिक हथियारों और रडार सिस्टम से लैस इस युद्धपोत की मौजूदगी ने आर्कटिक क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को फिर चर्चा में ला दिया है।
आर्ले बर्क क्लास के इस युद्धपोत में 96 वर्टिकल लॉन्च सेल हैं, जिनसे टॉमहॉक और स्टैंडर्ड सीरीज जैसी अलग-अलग मिसाइलें दागी जा सकती हैं। हालांकि, जहाज पर फिलहाल कितनी और कौन-सी मिसाइलें तैनात हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता इसका आधुनिक AN/SPY-6 रडार और एजिस बेसलाइन 10 कॉम्बैट सिस्टम है। ये तकनीकें हवाई खतरों और दुश्मन की मिसाइलों का पता लगाने के साथ उनसे निपटने में मदद करती हैं।
अलास्का और रूस के बीच बेरिंग जलडमरूमध्य स्थित है। इसके दूसरी तरफ रूस का चुकची क्षेत्र है। ऐसे में अमेरिकी युद्धपोत का यहां पहुंचना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इसे रूस के खिलाफ किसी विशेष सैन्य अभियान के लिए भेजे जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी नौसेना के अनुसार, USS Ted Stevens को 3 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इसका स्थायी ठिकाना वर्जीनिया का नॉरफोक होगा। जहाज का नाम अलास्का के पूर्व अमेरिकी सीनेटर टेड स्टीवंस के सम्मान में रखा गया है।


