अमेरिका और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच ओमान में हुई कथित बातचीत ने यमन संघर्ष को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने मस्कट में हूती प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब यमन के लाल सागर तट पर हूतियों की गतिविधियां बढ़ी हैं और सऊदी अरब को उनके हमलों का सामना करना पड़ रहा है।


रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हूतियों ने अमेरिकी अधिकारियों को आश्वासन दिया कि वे अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। वहीं, सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को लेकर अलग रुख सामने आया है। हालांकि, अमेरिका और हूतियों की ओर से किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी कहा है कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका के लिए लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा अहम मुद्दे हैं।


दूसरी ओर, सऊदी अरब के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सऊदी समर्थित यमनी बल हूतियों को रोकने में अब तक निर्णायक सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं। पाकिस्तान और तुर्की ने यमन में सैन्य अभियान से दूरी बनाई है, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन ने हूती ठिकानों पर नए हवाई हमलों से भी परहेज किया है।


ऐसे में संभावित अमेरिकी-हूती सहमति सऊदी अरब की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम को औपचारिक समझौता मानना अभी जल्दबाजी होगी।