टाटा संस की संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बोर्ड के बीच मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस को सूचीबद्ध करने के कदम का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आईपीओ पर आगे बढ़ने से पहले कंपनी को सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए कार्यकारी चेयरमैन के रूप में फिर से नियुक्त करने के साथ संभावित लिस्टिंग से जुड़े कदम उठाने का फैसला किया है। इसके बाद नोएल टाटा ने बोर्ड बैठक में अपना पक्ष रखा। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और ट्रस्ट ने लिस्टिंग पर सहमति नहीं दी है।
नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा संस केवल एक सामान्य होल्डिंग कंपनी नहीं है। उन्होंने कहा कि इसकी मौजूदा स्वामित्व संरचना टाटा समूह के कारोबार और परोपकारी गतिविधियों के बीच संबंध बनाए रखने में महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, सार्वजनिक लिस्टिंग के बाद कंपनी को नए शेयरधारकों के हितों और वित्तीय रिटर्न की अपेक्षाओं को भी ध्यान में रखना पड़ेगा।
यह विवाद भारतीय रिजर्व बैंक के 11 सितंबर के पत्र के बाद बढ़ा है। आरबीआई ने टाटा संस के पंजीकरण प्रमाणपत्र को स्वेच्छा से सरेंडर करने का आवेदन स्वीकार नहीं किया और कंपनी को लागू नियामकीय नियमों का पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा।
नोएल टाटा ने आरबीआई से पुनर्विचार का अनुरोध, कानूनी सलाह और पुनर्गठन सहित अन्य विकल्पों की जांच करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय से पहले टाटा ट्रस्ट्स से भी सलाह ली जानी चाहिए।