कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI व्यापारी लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। National Payments Corporation of India (NPCI) के नए नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने हैं।


नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। हालांकि, ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। वहीं, ₹2,000 तक के P2M भुगतान और Person-to-Person (P2P) लेनदेन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।


डीके शिवकुमार ने इस फैसले को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत पड़ने से इसका असर आगे ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि कुछ कारोबारी बढ़ी हुई लागत को सामान और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं।


इस मुद्दे पर विपक्ष के कई नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, सरकार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। इसके जरिए UPI सिस्टम के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और संचालन से जुड़ी लागत को समर्थन देने का उद्देश्य बताया गया है। ग्राहकों से सीधे यह शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
छोटे व्यापारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है। ₹1 लाख तक की मासिक UPI प्राप्तियों वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से छूट दी गई है।