दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित हिंसा, गुंडागर्दी और नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और केंद्र से पूछा कि चुनाव प्रचार के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।


सुनवाई के दौरान अदालत ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों, बड़े वाहन काफिलों और उम्मीदवारों की तस्वीरों वाले वाहनों पर सवाल उठाए। अदालत के सामने ऐसी तस्वीरों का भी जिक्र हुआ, जिनमें कई गाड़ियों के काफिले और वाहनों की छत या बोनट पर खड़े लोग दिखाई दे रहे थे। कोर्ट ने पूछा कि ऐसे स्पष्ट उल्लंघनों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।


सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में चालान जारी किए गए हैं, कई वाहन जब्त किए गए हैं और कुछ मामलों में एफआईआर व गिरफ्तारियां भी हुई हैं। एक शिक्षक पर कथित हमले के मामले में भी अदालत ने जानकारी मांगी।


कोर्ट ने छात्र संगठनों और उम्मीदवारों के आचरण पर भी सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल माफी या आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जरूरी है।


अदालत ने दिल्ली पुलिस और DU को कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई संतोषजनक नहीं मिली तो DUSU चुनाव की मतगणना या नतीजों की घोषणा पर रोक लगाने जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने 18 सितंबर को होने वाली वोटिंग पर तत्काल रोक नहीं लगाई है।