अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच पेट्रोल और डीजल महंगे होने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल दोनों ईंधनों की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार की प्राथमिकता देश में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

22 सितंबर को भारतीय कच्चे तेल की कीमत 115.27 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार दबाव में हैं।

रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियों को रोजाना लगभग 530 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हो रहा है। कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर नकारात्मक है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी लगभग 300 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं। इससे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

सरकार रूस से कच्चे तेल की स्थिर खरीद जारी रखने के साथ अन्य देशों से आयात बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है। इराक और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ आपूर्ति संबंधी संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो तेल कंपनियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का फैसला नहीं किया है।