इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी गंभीर चिंता जता चुका है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने जीवनरक्षक दवाओं की ऊंची कीमतों पर सवाल उठाए। अदालत ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत महंगी दवाओं के भुगतान से सार्वजनिक धन पर पड़ने वाले बोझ का मुद्दा भी उठाया।
आजतक की टीम ने दिल्ली कैंसर इंस्टीट्यूट में मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने इलाज के बढ़ते खर्च और महंगी दवाओं के कारण आने वाली आर्थिक परेशानियां साझा कीं।
याचिकाकर्ता किशन चंद जैन ने दवा मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत कीमतों के प्रभावी नियमन की मांग उठाई है। याचिका में सस्ती जेनेरिक दवाओं और आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित है।

